Best Places in Darbhanga Part-2: दरभंगा उत्तर बिहार का एक प्रमुख जिला और कमिश्नरी (प्रमंडल) है। दरभंगा प्रमंडल के अंतर्गत तीन जिले दरभंगा, मधुबनी, एवं समस्तीपुर आते हैं। बिहार की राजधानी पटना से यह लगभग 140 किलोमीटर दूर है। जिले की स्थापना 1875 में की गई थी। दरभंगा जिले की मुख्य नदी बागमती है। यह नदी दरभंगा जिले के बीच से बहती है। दरभंगा 16वीं सदी में स्थापित दरभंगा राज की राजधानी था। अपनी प्राचीन संस्कृति और बौद्धिक परंपरा के लिये यह शहर विख्यात रहा है। इसके अलावा यह जिला आम और मखाना के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। दरभंगा जिले में आपको प्राचीन महल एवं किले के अवशेष देखने के लिए मिलते हैं। इस आलेख में हम आपको दरभंगा के कुछ अन्य महत्वपूर्ण (Tourist places of Darbhanga) दर्शनीय स्थल के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
Best Places in Darbhanga Part-2: Manokamna Mandir Darbhanga (मनोकामना हनुमान मंदिर दरभंगा):
यह मंदिर दरभंगा जिला के राज परिसर में स्थिति है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि यहां से मांगी गयी मुराद जरूर पूरी होती है। इसलिए इस मंदिर का नाम ही मनोकामना मंदिर पड़ गया है। इस मंदिर का निर्माण समतल भूमि से लगभग 7 फुट ऊंचाई पर एक बड़े चबूतरे पर सफेद संगमरमर से किया गया है। इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए भक्तों को मंदिर के बाहर घुटने पर बैठना पड़ता है, क्योंकि मंदिर का आकार छोटा है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा रामेश्वर सिंह ने अपने किसी रिश्तेदार के लिए करवाया था जिनका कद काफी छोटा था।

इस मंदिर में स्थित हनुमान जी से अपनी मनोकामना पूरी करवाने का तरीका अनूठा है। दरभंगा के मनोकामना मंदिर में मनोकामना पूरी करवाने के लिए लोग अपने घर से कलम या पेंसिल लेकर आते हैं। मंदिर में पूजा करने के बाद कलम और पेंसिल से मंदिर के संगमरमर की दीवारों पर अपनी मनोकामना लिखते हैं। इसीलिए मंदिर की पूरी दीवाल पर भक्तों की ओर से लिखा गया मन्नत देखने को मिलेता है।
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Jama Masjid Laheriasarai जामा मस्जिद, बाकरगंज (लहेरियासराय):
यह मस्जिद 6 दशकों से अपनी भव्यता और दुधिया चमक के कारण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दो उंची-उंची मीनारें एवं तीन बड़े-बड़े गुंबद दूर तक लोगों को मस्जिद की खूबसूरती का एहसास कराती है। देश की आजादी के सात साल बाद 1954 में बाकरगंज ही नहीं बल्कि शहर के कई गणमान्य लोगों ने खपड़ेपोश मस्जिद को तोड़कर बड़ी और खुबसूरत मस्जिद बनाने का फैसला आपस में लिया। करीब 6 वर्षों की म्हणत के बाद 1960 में यह मस्जिद बन कर तैयार हुई थी।

मस्जिद में प्रवेश करते ही दोनों ओर बड़ा सा वजूखाना है। जो थके हारे लोगों को बाहरी गंदगी और आंतरिक थकान को उतारने को वजू करने के लिए प्रेरित करता है। फिर आता है बड़ा सा आंगन जो नमाजियों को सकून का एहसास कराता है। मस्जिद के अंदर में नमाजियों के लिए आठ सफ लगाये गये हैं। तीन मंजिला इस मस्जिद में लगभग एक हजार आदमी एक साथ नमाज अदा करते हैं। जुमा की नमाज के अलावा ईद और बकरीद की नमाज के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं।
दरभंगा राज किला (Darbhnga Raj Fort):
दरभंगा में 1934 ईस्वी के प्रलयंकारी भूकंप के बाद दरभंगा महराज के द्वारा राज किला की स्थापना की गई थी। किले के निर्माण के लिए ब्रिटिश फर्म के ठेकेदार बैग कैगटीम को जिम्मेदारी दी गई थी। यह 85 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। जानकार बताते हैं कि इस किले की उंचाई दिल्ली के लाल किले से भी कई फ्फेत ज्यादा है।वर्तमान में यह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पश्चिम में अवस्थित है। किला के अन्दर कई भव्य मंदिर बनाये गए है।
इसकी ऊँची दिवार राजस्थान एवं दिल्ली में अवस्थिति ऐतहासिक किलो की भांति दर्शनीय है। किले के मुख्य द्वार जिसे सिंहद्वार कहा जाता है पर वास्तुकला से दुर्लभ दृश्य उकेड़े गयें है। किले के भीतर दीवार के चारों ओर खाई का भी निर्माण किया गया था। उस वक्त खाई में बराबर पानी भरा रहता था। ऐसा किले और वस्तुतः राज परिवार की सुरक्षा के लिए बनाये जाते थे। महाराजा महेश ठाकुर के द्वारा स्थापित एक दुर्लभ कंकाली मंदिर भी इसी किले के अंदर स्थित है।
क्रमश… : अगले पार्ट में दरभंगा जिले के कुछ अन्य दर्शनीय स्थल की जानकारी देंगे।
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