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राजगीर में विश्वप्रसिद्ध मलमास मेला शुरू, 33 करोड़ देवी-देवताओं का हुआ आह्वान

सावन महीने के दौरान 18 जुलाई से मलमास शुरू हो गया है. इसी के साथ बिहार के नालंदा जिले में स्थित राजगीर में विश्व प्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला ( Rajgir Malmas Mela) का भी शुभारंभ हो गया. मंगलवार को सिमरिया घाट के स्वामी चिदात्मन जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने ध्वजारोहण के साथ मेला का शुभारम्भ किया. इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना कर 33 करोड़ देवी देवताओं का आह्वान किया गया.

मलमास मेला को राजकीय मेला का प्राप्त है दर्जा

आपको बताते चलें कि राजगीर में लगने वाले मलमास मेला को राजकीय मेला का दर्जा प्राप्त है. इस कारण यहाँ सरकार की तरफ से अच्छी व्यवस्था की जाती है. मान्यता है कि मलमास में सभी देवी देवता राजगीर में ही वास करते हैं. मेला शुरू होने के साथ ही साधु, संत एवं श्रद्धालुओं का राजगीर आना शुरू हो गया है. श्रद्धालुओं ने पहले दिन सतधारा ब्रह्मकुंड में स्नान कर पूजा अर्चना की. यह मेला 16 अगस्त तक चलेगा. इस मौके पर ब्रह्मकुंड द्वार के सामने पूरे विधि-विधान से संत-महात्माओं और भक्तजनों ने पूजा-अर्चना की.

भक्तों की सुविधा का खास ध्यान

मेले में व्यवस्था को लेकर बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राजकीय मलमास मेला को लेकर श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधा का ख्याल रखा गया है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी नहीं हो. वहीँ , सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि साधु संत एवं श्रद्धालुओं को सभी प्रकार की सहूलियत देने का इंतजाम किया गया है. वहीँ, मलमास मेला के राष्ट्रीय मेला की मांग पर सांसद ने कहा कि यह केंद्र सरकार के अधिकार में है.

33 करोड़ देवी-देवता का रहेगा निवास

हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी देवताओं को माना जाता है. मान्यता है कि अधिमास में 33 कोटि देवी-देवता एक महीने तक राजगीर में ही प्रवास करते हैं. इसलिए यहाँ दूर-दूर से भक्त पहुँचते हैं. अबकी राजगीर में चार शाही स्नान होंगे. राजगीर में 22 कुंड और 52 जल धाराओं में इस बार श्रद्धालु स्नान कर सकेंगे. सभी कुंड और जल धाराओं का जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें सबसे खास वैतरणी नदी है.

इस नदी तट को लोग प्राचीन समय से ही गाय की पूंछ पकड़कर पार किया करते थे. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से उन्हें सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है. वहीँ ,जिला प्रशासन द्वारा संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है.

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